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उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ

देश में मुख्यमंत्री (CM) का ट्रांसफर या स्थानांतरण का कोई सिस्टम नहीं है, क्योंकि भारत में हर प्रदेश के मुख्यमंत्री जनता के द्वारा चुने गए विधायक दल के बहुमत से चुनकर आते हैं, और उनका स्थानांतरण नहीं, बल्कि इस्तीफा, बर्खास्तगी या अगला चुनाव ही उनका पद बदलता है। मुख्यमंत्री की जगह बदलना संभव नहीं होता, क्योंकि ये कोई सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि एक संवैधानिक पद है। अफसरों, कर्मचारियों का ट्रांसफर जरूर होता है, लेकिन मुख्यमंत्री का नहीं।

अगर ऐसी व्यवस्था होती कि मुख्यमंत्री का ट्रांसफर हो सकता है — जैसे कि शिक्षक, पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अफसरों का तो लोग सबसे ज्यादा योगी आदित्यनाथ जी को अपने-अपने राज्य में लाने की मांग करते क्योंकि वे बहुत लोकप्रिय, साहसी और अनुशासनप्रिय माने जाते हैं। हर प्रदेश के लोग अपनी-अपनी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए योगी जी जैसे मुख्यमंत्री की कल्पना जरूर करते।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी तंत्र में चले आ रहे ट्रांसफर-पोस्टिंग के पुराने सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां बड़े पैमाने पर अफसरों की ट्रेडिंग, पैसे लेकर पोस्टिंग व मनमाफिक ट्रांसफर होते थे, अब योग्यता व निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाती है। सीएम योगी ने हाल ही में दिल्ली से जारी 200 से अधिक ट्रांसफर आदेश रद्द कर एक बड़ा संदेश दिया कि अब ट्रांसफर केवल उनके विज़न और जरूरत के मुताबिक ही होंगे, ना कि बाहरी दबाव या पैसे के बल पर।

कुछ वर्षों में यूपी में पोस्टिंग-ट्रांसफर सिस्टम के भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिस पर विपक्षी दलों व मीडिया ने भी सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि कहीं न कहीं ट्रांसफर-पोस्टिंग एक धंधा बन चुकी थी, लेनदेन करके मनचाही पोस्टिंग हासिल की जाती थी। इस धांधली के खिलाफ मुख्यमंत्री ने मोर्चा खोल दिया है और कहा है कि अब किसी की सिफारिश, पैसे या दिल्ली के इशारे पर ट्रांसफर नहीं होगा, बल्कि योग्यता ही पैमाना होगी।

यह कदम केवल एक एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है कि अब प्रदेश की प्रशासन व्यवस्था में एक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। योगी आदित्यनाथ ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं व अधिकारियों को भी साफ संकेत दिए, जो ट्रांसफर के जरिए अपनी लॉबी और सत्ता कायम करना चाहते थे। अब सरकार का पूरा फोकस जनता की भलाई व भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर है, इसलिए ट्रांसफर में भी पारदर्शिता, जरूरत और मेरिट पर ही कार्य होगा।

ऐसे में अगर कल्पना करें कि मुख्यमंत्री का भी ट्रांसफर होता, तो यकीनन हर राज्य के लोग योगी जी को मांगने लगते क्योंकि उनकी छवि कड़क, निष्पक्ष व निर्णय लेने वाली है। हालांकि संवैधानिक व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं। मुख्यमंत्री केवल विधायकों के बहुमत, दल बदल या राज्यपाल की सिफारिश पर ही हट सकते हैं, न कि ट्रांसफर सिस्टम से।

सरकारी कर्मचारी (अफसर/क्लर्क) के ट्रांसफर की व्यवस्था बाकायदा नीति के तहत होती है। उदाहरण के लिए यूपी की हालिया ट्रांसफर पॉलिसी के तहत, जिन अधिकारियों या कर्मचारियों को एक ही जगह तीन से सात साल हो गए, उनका ट्रांसफर किया जा सकता है। प्रतिशत के आधार पर कुल कर्मचारियों की एक निश्चित संख्या का ट्रांसफर होता है और इससे ज्यादा केस में मंत्री की मंजूरी जरूरी होती है। लेकिन मुख्यमंत्री के लिए कोई ऐसी नीति नहीं है; उनके पद का न तो ट्रांसफर होता है, न प्रमोशन, और न ही विभाग बदलता है

लोग योगी आदित्यनाथ जैसी मजबूत लीडरशिप हर प्रदेश में पाने की इच्छा जरूर रखते हैं, लेकिन जिस लोकतंत्र में हम रहते हैं, वहां एक मुख्यमंत्री का ट्रांसफर नहीं हो सकता। हां, उनकी लोकप्रियता जरूर इतनी है कि देशभर के लोग उनकी प्रशासनिक शैली की तारीफ करते हैं और चाहते हैं कि उनके प्रदेश में ऐसा नेतृत्व मिले। अगर आप मेरी बात से सहमत हैं तो कमेंट जरूर करें, क्योंकि भारत की जनता अब साफ, पारदर्शी और मजबूत नेतृत्व चाहती है, जैसे योगी जी ने यूपी में दिखाया है।

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