गैस की किल्लत क्यों हो रही है? युद्ध का असर भारत तक – एक बिहारी नजर से
आजकल देश के कई हिस्सों में गैस की कमी और बढ़ती कीमत की चर्चा तेज हो गई है। CNG पंप पर लाइन लंबी हो रही है, इंडस्ट्री में भी गैस सप्लाई कम मिलने की शिकायतें आ रही हैं। ऐसे में आम आदमी के मन में एक सवाल उठता है – आखिर भारत में गैस की किल्लत क्यों हो रही है?
अगर इस बात को आसान भाषा में समझें, तो इसका एक बड़ा कारण विदेशों में चल रहा युद्ध और हमले भी हैं।
भारत अपनी जरूरत की काफी प्राकृतिक गैस बाहर के देशों से खरीदता है। इनमें से कुछ बड़े गैस सप्लाई करने वाले देश इन दिनों युद्ध, हमलों या तनाव का सामना कर रहे हैं। जब किसी देश में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो वहां की गैस प्रोडक्शन, पाइपलाइन और एक्सपोर्ट सिस्टम प्रभावित हो जाता है। इसका सीधा असर पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ता है।
अब जब सप्लाई कम हो जाती है और मांग पूरी दुनिया में उतनी ही रहती है, तो गैस की कीमत अपने आप बढ़ जाती है। यही कारण है कि भारत को भी अब गैस महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही है।
दूसरा कारण है कि भारत में गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है। आजकल CNG गाड़ियां बढ़ रही हैं, फैक्ट्रियों में गैस का इस्तेमाल बढ़ रहा है और शहरों में पाइप गैस (PNG) भी ज्यादा लोगों तक पहुंच रही है। लेकिन सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही।
तीसरी समस्या है सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं। पाइपलाइन, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की दिक्कतों की वजह से भी कई बार गैस हर जगह समय पर नहीं पहुंच पाती।
अगर इसे बिल्कुल देसी उदाहरण से समझें, तो जैसे गांव में एक ही कुआं हो और अचानक आधा गांव बाहर से पानी लेने आने लगे। ऊपर से अगर कुएं में पानी भी थोड़ा कम हो जाए, तो किल्लत होना तय है।
बिहारी भाषा में कहें तो –
“बाहर वाला देश जहां से गैस आता है, वहीं युद्ध और हमला चल रहा है। इसलिए गैस का सप्लाई कम हो गया है और दाम बढ़ गया है। उसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।”
हालांकि सरकार नए गैस प्रोजेक्ट, पाइपलाइन और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में देश को बाहरी सप्लाई पर कम निर्भर रहना पड़े।
लेकिन फिलहाल सच्चाई यही है कि दुनिया में कहीं भी युद्ध या संकट होता है, तो उसका असर भारत जैसे बड़े देश तक जरूर पहुंचता है।
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